"कब तक तुम मासूम छ्तों पे
ऐ बादल ना बरसोगे
बरस पड़ो ऐ बादल अब तो
ना बरसे तो तरसोगे ।
तन भी तेरा मन भी तेरा
ताना बाना पानी का
कब तक सबको तरसाओगे
ऐ बादल कब बरसोगे ।
ना तुम धानी चुनरी देते
ना आंचल का सार बढाते
इस धरती के तुकड़े हो तुम
कब तक तुम ना बरसोगे ।
ताल तल्लयां नदियां सूखी
पशु-पक्षी हैरान फिरें
क्या इनकी मासूम परों पे
ऐ बादल ना बरसोगे ।
धरती का तन मीलों सूखा
और पांवों मे बीवाई
क्या वसुधा इन पावों पे
ऐ बादल ना बरसोगे ॥
"दीद" लखनवी
congratulations...first post...:)
ReplyDeleteIrshaad!Barso aur barso!
ReplyDeleteहे मित्र कब तक दर्शन न दोगे इस विदेशी धरती पे। इसको एडिट करने की आवश्यकता है। ’कब तक तुम मासूम छतों (पे)’। ’पे’ खा गऎ या भूल गऎ। सुन्दर।
ReplyDeleteJo Baras Baras Kay Tham gaye
ReplyDeleteWo Badal Thay Ya Aansoon Thay
Tip Tip Gintay Yug Beetay
Ab Badal Thay na Aansoon Thay...
Thanks to all my dear friends...!!
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